मेरे खुदा और तेरे खुदा में मेहज इक बात का अन्तर है
मेरा खुदा कई भेष बदलता है वो बहरूपिया है
कभी सफ़ेद रंग पहनता है कभी गेरुए रंग में आता है
भाता उसे कभी सियाह रंग है तो कभी नीले में छुप आता है
कभी उसका घर जब मुझे मस्जिद में दिखता है
तब मुझे वो अल्लाह के नाम से याद आता है
कभी उसका घर मुझे मन्दिर में नज़र आता है
तब मुझे वह राम के नाम से याद आता है
हर बार इक नाये नाम से याद आया है
मेरा खुदा एक बहरूपिया है
कभी सिजदे में सर झुका तो कभी हाथ उठ गए दुआओ में
कभी जोड़ लिये हाथ मैने उसकी बन्दगी में
हर बर मुझे वह इक अलग अन्दाज़ में नज़र आया है
मेरा खुदा इक बहरूपिया है