ਮੇਰੇ ਸਵਾਰਥੀ ਵਿਚਾਰ
Thursday, 17 July 2014
उलझन
यह भी क्या कम उलझन है ए मेरे खुदा
जब तुझे जाना न था तो बड़ी बेएतबारी थी
अब जब जानना चाहा है तो बेचैनी बहुत है
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